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PoorBest 
हेपार्थ!! (कर्मचारी),
इनक्रीमेंट अच्छा नहीं हुआ, बुरा हुआ….
इनसेंटिव
नहीं मिला, ये भी बुरा हुआ
वेतन
में कटौती हो रही है बुरा हो रहाहै, ….. तुम पिछले इनसेंटिव ना मिलने का पश्चाताप ना करो,
तुम
अगले इनसेंटिव की चिंता भी मत करो,
बस
अपने वेतन में संतुष्टरहो…. तुम्हारी जेब से क्या गया,जो रोते हो?
जो
आया था सब यहीं से आया था तुम जब नही थे, तब भी ये कंपनी चल रही थी,
तुम
जब नहीं होगे, तब भी चलेगी,
तुम
कुछ भी लेकर यहां नहीं आए थे..
जो
अनुभव मिला यहीं मिला
जो
भी काम किया वो कंपनी के लिए किया,
डिग़्री
लेकर आए थे, अनुभव लेकर जाओगे…. जो कंप्यूटर आज तुम्हारा है,
वह
कल किसी और का था….
कल
किसीऔर का होगा और परसों किसी और काहोगा..
तुम
इसे अपना समझकर क्यों मगन हो..क्यों खुश हो
यही
खुशी तुम्हारी समस्त परेशानियों का मूल कारण है
क्यो
तुम व्यर्थ चिंता करते हो, किस से व्यर्थ डरते हो,
कौन
तुम्हें निकाल सकताहै… ? सतत "नियम- परिवर्तन" कंपनी का नियम है
जिसे
तुम "नियम-परिवर्तन" कहते हो, वही तो चाल है
एक
पल में तुम बैस्ट परफॉर्मर और हीरो नम्बर वन या सुपरस्टार हो,
दूसरे
पल में तुम वर्स्ट परफॉर्मर बन जाते हो ओर टारगेट अचीव नहीं कर पाते हो.. ऎप्रेजल,इनसेंटिव ये सब अपने मन से हटा दो,
अपने विचार से मिटा दो,
फिर कंपनी तुम्हारी है और तुम कंपनीके…..
ना ये इन्क्रीमेंट वगैरह तुम्हारे लिए हैं
ना तुम इसके लिये हो,
परंतु तुम्हारा जॉब सुरक्षितहै
फिर
तुम परेशान क्यों होते हो……..?

तुम
अपने आपको कंपनी को अर्पित करदो,
मत करो इनक्रीमेंट की चिंता…बस मनलगा कर अपना कर्म किये जाओ…
यही
सबसे बड़ा गोल्डन रूलहै
जो
इस गोल्डन रूल को जानता है..वो ही सुखी है…..

वोह
इन रिव्यू, इनसेंटिव, ऎप्रेजल, रिटायरमेंट आदि के बंधन से सदा के लिए मुक्त हो  जाता है….
तो
तुम भी मुक्त होने का प्रयास करो और खुश रहो…..
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Written by Himanshu Kulshrestha Gaharana   
 
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