इनक्रीमेंट अच्छा नहीं हुआ, बुरा हुआ…. इनसेंटिवनहीं मिला, येभी बुरा हुआ… वेतनमें कटौती हो रही है बुरा हो रहाहै, …..तुम पिछले इनसेंटिव ना मिलने का पश्चाताप ना करो, तुमअगले इनसेंटिव की चिंता भी मत करो, बसअपने वेतन में संतुष्टरहो….तुम्हारी जेब से क्या गया,जो रोते हो? जोआया था सब यहीं से आया था…तुम जब नही थे, तब भी ये कंपनी चल रही थी, तुमजब नहीं होगे, तबभी चलेगी, तुमकुछ भी लेकर यहां नहीं आए थे.. जोअनुभव मिला यहीं मिला… जोभी काम किया वो कंपनी के लिएकिया, डिग़्रीलेकर आए थे, अनुभव लेकर जाओगे….जो कंप्यूटर आज तुम्हारा है, वहकल किसी और का था…. कलकिसीऔर का होगा और परसों किसी और काहोगा.. तुमइसे अपना समझकर क्यों मगन हो..क्यों खुश हो… यहीखुशी तुम्हारी समस्त परेशानियों का मूल कारण है… क्योतुम व्यर्थ चिंता करते हो, किस से व्यर्थ डरते हो, कौनतुम्हें निकाल सकताहै… ?सतत "नियम- परिवर्तन" कंपनी का नियम है… जिसेतुम "नियम-परिवर्तन" कहते हो, वही तो चाल है… एकपल में तुम बैस्ट परफॉर्मर और हीरो नम्बर वन या सुपरस्टार हो, दूसरेपल में तुम वर्स्ट परफॉर्मर बन जाते हो ओर टारगेट अचीव नहीं कर पाते हो..ऎप्रेजल,इनसेंटिव ये सब अपने मन से हटा दो, अपने विचार से मिटा दो, फिर कंपनी तुम्हारी है और तुम कंपनीके….. नाये इन्क्रीमेंट वगैरह तुम्हारे लिए हैं ना तुम इसके लिये हो,परंतु तुम्हारा जॉब सुरक्षितहै फिरतुम परेशान क्यों होते हो……..? तुमअपने आपको कंपनी को अर्पित करदो, मत करो इनक्रीमेंट की चिंता…बस मनलगा कर अपनाकर्म किये जाओ… यहीसबसे बड़ा गोल्डन रूलहै जोइस गोल्डन रूल को जानता है..वो ही सुखी है….. वोहइन रिव्यू, इनसेंटिव, ऎप्रेजल, रिटायरमेंट आदि के बंधन से सदा के लिए मुक्त होजाता है…. तोतुम भी मुक्त होने का प्रयास करो औरखुश रहो…..